Newsflash
We have launched a special section featuring transcripts and more from radio programs for the enjoyment of fans. Thanks a lot to Sujoy Chatterjee, Ramaswamy and other contributors to the section. If you wish to provide more such content or help in posting transcripts please contact the administrator. This new section canbe accessed by clicking on Radio Se in the Specials Menu. Enjoy! You can also reach it by clicking Radio Se |
| गायकी में शोहरत की बुलन्दियों से किराने की दुकान तक: जी एम दुर्रानी |
|
|
|
| Written by Gajendra |
|
Source: indianhitler.wordpress.com Thanks to the author Sagar ji for the informative article.
हिन्दी फिल्मों में जिस तरह किशोर कुमार और मुकेश ने कुन्दन लाल सहगल से प्रेरित हो कर गाना शुरु किया, ठीक उसी तरह मोहम्मद रफी ने गुलाम मुस्तफा दुर्रानी यानि जी एम दुर्रानी से प्रेरित हो कर अपनी गायन शैली बनाई। शायद आपने जी एम दुर्रानी की पहाडी आवाज सुनी भी होगी। फिलहाल आपको जी एम दुर्रानी का एक मशहूर गाना सुना रहा हूँ जो फिल्म मिर्जा साहेबान (Mirza Saheban 1947) का है और जिसके गीतकार अजीज कश्मीरी और संगीत निर्देशक पंडित अमरनाथ थे। इस गाने में जी एम दुर्रानी का साथ दिया है मल्लिका ए तरन्नुम नूरजहाँ ने। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी त्रिलोक कपूर और नूरजहाँ ने। इस गाने को ध्यान से सुनने पर पता चलता है कि एक बार भी नायिका/ गायिका पूरे गाने में एक बार भी यह नहीं कहती कि हाथ सीने पे रख दो… यानि संगीतकार ने धुन बनाते समय भी मर्यादा का कितना ध्यान रखा। जी: हाथ सीने पे रख दो तो करार आ जाये दिल के उजड़े हुए गुलशन में बहार आ जाये नू: दिल तो कहता है कि आँखो में छुपा लूं तुझको जी:हाथ सीने पे रख दो तो करार आ जाये नू: यूं खुदा के लिये छेड़ो ना मेरे होशो हवास जी:हाथ सीने पे रख दो तो करार आ जाये
|
Artists













